शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

बाबाओं का क्रेज़...

आज कल सुबह सुबह आँख खोलो और अगर सोच लो की भगवान् का दर्शन कर लें तो वो बड़ा मुश्किल है.आजकल तो  भगवान् से ज्यादा ऊँचा दर्ज़ा ये आज कल के टी.वी. बाबा लोगों को मिल गया है.आज कल ये एक फैशन ट्रेंड सा हो गया है.अब तो अलग अलग धर्मों के लिए अलग अलग बाबा हो गए हैं.कोई हिन्दू धर्मं की तो कोई सिख धर्मं की बातें करता है.धर्म का प्रसार और प्रचार करने वालों ने हमेशा भगवान् को एक माना है पर इन लोगों ने तो पूरी तरह से भगवान् को जगह जगह अलग अलग समय में भी बाँट  दिया है.ये बाबा लोग खुद तो ईश्वर को एक ही बताते हैं पर ये खुद अलग अलग हो गए हैं.सुबह सुबह सोकर उठने के बाद बस अलग अलग चैनल पर आपको अलग अलग बाबा अपना प्रवचन सुनाते  मिल जायेंगे.आज ये एक स्टेट्स सिम्बल भी हो गया है.अब तो हमारी मीडिया भी इन बाबा लोगों को प्रमोट करती नज़र आ रही है.अब तो न्यूज़ दिखाने वाले चैनलों ने भी इनको अपनी एक नयी तस्वीर पेश करने के लिए रख लिया है.आज बाबा लोग एक ऊँचे से मंच पर बैठ जायेंगे और खूब ढेर सारे लोगों की भीड़ उनके सामने बैठी होगी और पूरे मन से वो उसी प्रवचन में लीन रहती हैं.
और बाबा लोगों से अगर फुर्सत मिले तो एक नए फैशन के तौर पर लोग अपने उत्पाद बेचते मिल जायेंगे.कही महालक्ष्मी श्री यन्त्र,पूजा से सम्बन्धित,तो कही कोई औषधि का प्रचार.......बहुत ज्यादा हुआ तो कुंडली का विश्लेषण करते अगले चैनल पर पंडित जी लोग मिल जायेंगे
आखिर ये सब क्या है पूरी तरह से दिशा भ्रमित करने का आसान तरीका ही तो है आम जनता को.
आज हम आम जनता के संवेदनाओ की क़द्र न करते हुए ये लोग आराम से अपने कार्यक्रम को बढ़ावा देते हैं.आज भोली-भाली जनता इस तरह के बहकावे में आ जाती है और पूरी तरह से धोखा खाती है.ज़िन्दगी से दिशाभ्रमित हो जाने वाले लोग इस मकड़ जाल में फंसते चले जा रहे हैं.

12 टिप्‍पणियां:

  1. सत्य है..........ये बाबा लोग ही सबको दिग्भ्रमित कर रहे हैं...... अनावश्यक बाबाओं का उन्मूलन आवश्यक है....... बढ़िया पोस्ट है ......

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  2. भ्रमित करके लोगों को ठगना और सम्वेदनाओं को भुनाना मकसद है

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  3. बहुत सुन्दर , सार्थक प्रस्तुति,आभार.

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें .

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  4. ये आज के वक्त का एक बहुत ही फायदेवाला बिजनेस हो गया है जिसमे मुनाफा पक्का है...

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  5. apne sabhi shubh chintakon se shama ke saath nivedan hai ki jab 9.0% growth ki chahat hai to kya yeh geometrically nahi hoga? agar hona chahiye to phir in Babaon se shikayat kyon ?

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  6. Saarthak prastuti ke liye bahut bahut aabhar .kash ye link kuch pakhnadi babao tak bhi pahuch jaye

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  7. अब एक Anti-बाबा आन्दोलन चलने की जरूरत है.

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