बुधवार, 7 सितंबर 2011

गलतियों को दोहराना हमारी आदत है ...

क बार फिर हुआ देश की राजधानी पर वार...इतनी बड़ी ,दिल देहला देने वाली घटना पर अब कल से बड़े बड़े नेताओं,मंत्रियों,और सलेब्रेटियों की टिप्पड़ियाँ और शोक सन्देश आना शुरू हो गए हैं और तुरंत लगभग लगभग सभी जगह सुरक्षा के कड़े इन्ज़ाम भी कर दिए गए.किसी ने कहा इस घटना से हमें बहुत दुःख है,किसी ने कहा भगवान सबको दुःख सहन करने की शक्ति दे,किसी ने कहा हमारी संवेदना सभी के साथ है...और किसी ने तो मुआवजे की घोषणा कर डाली..ये तो बात रही बड़े लोगों की पर घाटा होता है आम जनता का.इस पूरे देश की आम जनता क्या चाहती है,क्या सोचती है इससे किसी को कोई मतलब ही नहीं है.ये तो राजधानी की बात है और अभी कुछ ही दिन पहले १३ जुलाई २०११ को देश की आर्थिक राजधानी वालों ने भी इस मंज़र को बहुत करीब से ही देखा था.इन सभी मामलों में जान तो बस हम आम लोगों की ही जाती है...कभी किसी बड़े आदमी को कुछ नहीं होता वो तो बस घटना के बाद  हमेशा अपना दुःख प्रकट करने और संवेदना बाटनें में लग जाता है.सारी मीडिया घटना स्थल के बाद तमाम बड़े लोगों के पास उनका व्यक्तव्य लेने में लग जाती है.इतना कुछ होने के बाद भी कई नेता इस बीच राजनीति और सरकार तमाम दलीलें देना शुरू कर देती है.जहाँ जहाँ भी बम धमाके होते हैं वो कोई छोटी जगह नहीं होती,बड़ी राजधानी,बड़े शहर ही निशाना बनते हैं .जबकि देखा जाये तो वहां हर चीज़ के लिए जागरूकता सबसे ज्यादा है.वहां पर लोग जागरूक है और हर तरह से उन्हें सुरक्षित रखने की कोशिश भी की जाती है.और कई छोटी जगहों पर तो जागरूकता है ही नहीं...उदहारण के तौर पर अगर छोटे शहर या जगह पर किसी को कोई बैग लावारिस हालत में मिलता है तो वो सबसे पहले पुलिस को बताने की बजाय,वो खुद ही उसे लेकर भाग जायेगा .लेकिन बड़े शहरों में ऐसा नहीं है वह लोग तुरंत पुलिस सूचित करेंगे .पर फिर भी घटनाएँ रुकने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं.कुल मिलाकर न तो हम जागरूक हैं और न ही हमारी सरकार.और समय समय पर ऐसे झटके खाना तो हमारी आदत सी हो गयी है ...आये दिन ऐसी घटना होना तो स्वाभाविक है.फिर टेलीविज़न पर ब्रेकिंग न्यूज़ और न्यूज़ पेपर में बड़ी बड़ी हेडलाईन्स  के साथ खबरें परोस दी जाएँगी.हमारे देश के ऊपर भी यही बात सच साबित होती है की अगर हमारी गलती से हमें कोई नुकसान है तो हमें गलती से सीख लेनी चाहिए और अगर हम अपनी गलती से भी सीख नहीं लेते और उस गलती को दोहराते हैं तो वो हमारी आदत बन जाती है.

13 टिप्‍पणियां:

  1. हमारे देश की लचर व्यवस्था की वजह से ही कभी भी ऐसी घटनाये कही भी घटित हो सकती है और पश्चिमी देशो की तुलना में भारतीयों के जान की कीमत को राजनेता कुछ नहीं समझते है, हर घटना के बाद पी एम से लेकर सी एम तक शोक सवेदन व्यक्त की जाती है, मै इनलोगों से एक सवाल पूछता हु कि अगर उनके बी वी बच्चे रिश्तेदार इन विस्फोटों में मारे जाये तो भी क्या सुरक्षा व्यवस्था देश में ऐसे ही रहेगी ???? राजीव गाँधी की हत्या के बाद वी वी आई पी तो सुरक्षित हो गए लेकिन जनता की सुरक्षा को किसी ने आज तक गंभीरता से नहीं लिया ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. अगर हम अपनी गलती से भी सीख नहीं लेते और उस गलती को दोहराते हैं तो वो हमारी आदत बन जाती है

    सही कहा आपने;और यह आदत सुधारने का अब समय आ गया है।

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  3. sahi mudda uthaaya aapne....

    mere nayi post pe aapka swaagat hai

    http://raaz-o-niyaaz.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति , आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. सही कहा आपने .....अब तो हम सुधर जाएँ

    उत्तर देंहटाएं
  6. कल 15/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  7. अंधे ,गूंगे और बहरे क्या सुधरेंगे ?

    उत्तर देंहटाएं
  8. "चैन के दिन रात हिस्से हिंद के कब आयेंगे?"
    बढ़िया संवेदनशील आलेख...
    सादर बधाई....

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सार्थक लेख ....हमें स्वीकार करना होगा कि हम लगातार खतरे में हैं और अपने रहन-सहन/घूमने-फिरने में थोड़ा बदलाव लाना होगा । अलर्ट / विजिलेंट रहना होगा , सुरक्षा को प्राथमिकता देना होगा और पूरी आजादी से थोड़ा कंप्रोमाइज़ करना होगा । हाँ,सुरक्षा का बजट भी बढ़ाना होगा । सरकार और समाज- हर स्तर पर दृष्टिकोण परिवर्तन की ज़रूरत है , सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने वाली संस्कृति की ज़रूरत है । शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं