शुक्रवार, 13 मई 2011

अंकित नाम था प्यार से बुलाते थे सभी उसे लिटिल ......

न जाने हर दिन क्यों दुबारा लौट कर अपना एक एक साल पूरा
करता जाता  है.........और उस
बीते हुए लम्हों  कि  सारी यादों को दोहरा देता है..यादों को दोहराने के साथ साथ आँखों में कभी ख़ुशी तो कभी ग़म छोड़ जाता है..तभी तो आज १३ मई है और आज का दिन शायद मेरे और मेरे परिवार वालो के लिए बहुत ही
--------------- दिन होता है  ...
कहते हैं न कि तकदीर से ज्यादा कभी कुछ हासिल नहीं होता हमेशा उतना ही मिलता है,जितना मिलना लिखा होता है.ऐसा ही कुछ वाकया हमारे साथ भी १३ मई १९९८ को हुआ था.जब मेरा बड़ा भाई हमारे परिवार को छोड़ कर इस दुनिया से अलविदा कह गया.उसका नाम था अंकित पर प्यार से सभी उसे लिटिल बुलाते थे...घर का बड़ा बेटा जो था,सभी उसे बहुत प्यार करते थे.नाना, नानी, दादा, दादी सभी का उससे बड़ा लगाव था.माँ और पापा का तो दुलारा था.बहुत ही नटखट था हमेशा बदमाशी करना उसकी फितरत थी....पर हम सभी को वो छोड़ कर ऐसे चला जायेगा एक दिन कभी सोचा न था.
कहते है न अच्छे इन्सान ज्यादा दिन इस दुनिया में नहीं रहते.बस भगवन को भी यही मंजूर था और १३ मई १९९८ दिन बुधवार को एक ट्रेन दुर्घटना में वो हमें हमेशा के लिए छोड़ कर चला गया...जिसका दुख आज तक हमारे परिवार वालो को सताता है और शायद सताता रहेगा क्यूंकि ऐसे ज़ख़्म ज़िन्दगी में कभी नहीं भरते...और रह जाती हैं तो सिर्फ उनकी यादें.आज १३ मई का बीता वो दिन अपने १३ साल पूरे कर चुका है.
आज जैसे ही सुबह आँख खुली तो बस वही सारी चीज़े बस मन को थोड़ा परेशान कर रही है...पर समय बहुत ही बलवान होता है ये सारी परिस्थितियों को नियंत्रित कर देता है.आज से १३ साल पहले तो मै काफी छोटी थी फिर भी मुझे पूरी तरह से वो मंज़र याद है.मेरे भाई के जाने के बाद बहुत संभाला मैंने खुद को और अपने परिवार वालों को क्यूंकि उसके जाने के बाद घर में मैं ही बड़ी हूँ ....
इसी के साथ मै भगवान् से ये पूछना चाहती हूँ कि क्या जो हुआ वो सही था???
फ़िलहाल हम सभी भगवान् से प्रार्थना करते हैं कि वो जहाँ भी रहे भगवान् उसकी
आत्मा को शांति  दे ..

8 टिप्‍पणियां:

  1. NEHA JI AAPKI IS POST PAR MAI KYA COMMENT KARU SAMAJH NAHI AA RAHA HAI BAS ITNA HI KHUNGA KI..
    KI 'HONI KO KOI TAAL NAHI SAKTA'
    AAPKE BHAI SAHAB KE BAARE ME JAAN KR DUKH HUA.

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  2. बहुत दुःख हुआ यह पोस्ट पढ़ कर.कभी इन हालातों से मैं भी गुज़रा हूँ.
    हम बस यही कामना कर सकते हैं कि भैय्या आज जिस भी रूप में हों ठीक से हों.ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे.

    सादर

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  3. neha ji ..kehte hai na ki samay bara balban hota hai sare ghaw ko bhar deta hai,,,kya likhu samjh nhi pa rahi hu,,,,bhagban apke bhai ke aa`ta``m`a ko santi de....

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  4. कुछ कहना लाजिमी नहीं है...

    क्यूंकि भावनाओं और दर्द से सराबोर होते हुए भी जो सच बयान किया गया है कहा जाए तो उसे लफ़्ज़ों में कैसे तौलें हम...

    खुदा से आपके और आपके परिवर के लिए दुआ करेंगे....

    Bless You.

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  5. aap ne apne bhai ki dardnak ghatana bataker apne dil ka bojh halka ker liya ,jo jaroori tha
    bhagvan ke aage kisi ki nahi chalati yar

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  6. जीवन इसी का नाम है. कभी उतार कभी चढाव. अब जो दुःख देखना था वह देख लिया, परन्तु ऐसी घटनाएँ जब वचपन में ही देख लेते है तो भविष्य में किसी भी बात से डर नहीं लगता.

    अब भविष्य में ऐसा कुछ ना सहन करना पड़े, यही कामना है.

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  7. हमने सुना है कि जो अपने हाथ में ना हो, उस पर ज्यादा चिंतन ठीक नहीं। उसे भगवान पर छोड़ देना चाहिए। ये सोचकर कि हम सब एक ही ईश्वर के संतान है और कोई ईश्वर अपने संतान को मुसीबत में नहीं देख सकता।

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  8. haan kuch riston se bichadne ka gam bade gahre tak todta hai hamen...lekin jindagi dard ke dariya se ubar kar fir se sahil talashne ka prayash karti hai...

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