शनिवार, 30 अप्रैल 2011

पद नही इन्सान बडा होता है.........

माननीय कुलपति प्रो सुन्दर लाल
मीडिया कि पढ़ाई करते हुए मैंने सीखा कि सभी से अच्छे सम्बन्ध बनाने चाहिए .आप किसी के बारे में बिना जाने उसका मूल्यांकन नहीं कर सकते.आपकी परिकल्पना कुछ अलग हो सकती है और वो बदलती तब है जब आप उससे मुखातिब होते हैं और बातचीत करते हैं....आज कुछ ऐसा ही मुझे भी महसूस हुआ जब मैं अपने विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो सुन्दर लाल जी से मिली.वो बहुत ही सरल,सुशील,और सौम्य विचारों के लगे.आज मुझे उनसे मिलकर बहुत ही ज्यादा ख़ुशी हुई.हुआ यूँ कि आज एक कार्यक्रम के सिलसिले में मुझे उनका इंटरव्यू लेना था और जब मैं गयी तो शायद मेरे मन में कई तरह के प्रश्न थे कि पता नहीं कुलपति जी  कैसे है?किस विचारो के हैं?पर सच में वो बहुत ही अच्छे स्वभाव के हैं उन्होंने बहुत अच्छे से उस इंटरव्यू को सफल बनाया.मैं उनका बहुत बहुत धन्यवाद देती हूँ और गर्व करती हूँ कि हमारे विश्वविद्यालय को इतने अच्छे कुलपति मिले हैं.हमारे कुलपति जी बहुत मायने में अलग हैं और वो आज भी विश्वविद्यालय में कुलपति पद पर होने के बावजूद् नियमित रूप से अध्यापन कार्य करते हैं। आप को ये बता दू कि बाद में उन्होने मुझे बुलाकर मुझसे बाते भी की जो मुझे बहुत अच्छा लगा.शायद मिलने से पहले उनके लिए मेरी धारणा कुछ और थी पर कल मुलाकात के बाद लगा कि इन्सान जब बड़े और ऊँचे पद पर होता है तो उसके पद से ज़्यादा वो इन्सान बडा और मधुर स्वभाव का होता है.उसने मिलना और बाते करना मेरे लिये बहुत ही गर्व की बात है।

4 टिप्‍पणियां:

  1. एक अच्छे व्यक्तित्व से परिचित कराने के लिये आपका बहुत बहुत आभार.उम्मीद है कि यदि संभव जो तो इस ब्लॉग पर आप हम पाठकों को भी उस इंटरव्यू को पढ़ने का अवसर भी देंगी.

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  2. भूल सुधार -कृपया उपरोक्त टिप्पणी में 'यदि संभव जो तो ' को 'यदि संभव हो तो'पढ़ें.

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  3. सच लिखा है,मानवीय गुणों से ओतप्रोत और बहुत ही नेक दिल हैं हमारे कुलपति जी.

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