मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

समय कभी वापस नहीं आता ये वाकई मैंने महसूस किया

कहते है न समय कभी वापस नहीं आता ये वाकई मैंने आज महसूस किया कि बीता दिन कभी लौटकर नहीं आता.......पढाई लिखाई के इस अंग्रेजी दौर में ये तो चलन है कि अप्रैल माह आते आते स्कूलों में एडमिशन का दौर चलने लगता है जहाँ बच्चों कि लालसा उनकी नयी कॉपी,किताब,बैग,पेंसिल,रबर,नयी ड्रेस होती है वहीँ सबसे बड़ी दिक्कत माता पिता की जेब पर आ जाती है. लेकिन बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए उन्हें सब करना ही होता है.आज ही मैंने सुबह न्यूज़पेपर में पढ़ा कि कॉपी किताब न मिलने के कारण बहुत ही अभिभावक परेशान भी है मुझे पढ़ के ये दुःख भी हुआ !!!फ़िलहाल ये तो बात रही उनकी परेशानियों की पर यहाँ तो बच्चों की उत्सुकता की है.आज छोटे भाई की नयी किताब,कॉपी,बैग आने से उसकी तो ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था मुझे अच्छा तो लगा पर सच में गुज़रा वो अपना दिन मुझे याद आ गया कि मै भी कभी ऐसी थी और मै भी बहुत खुश होती थी कि कल से स्कूल,नए दोस्त,नयी सीट,सभी नया नया होगा.बचपन के वो दिन कब गुज़र जाते है पता ही नहीं चलता और तब जल्दी से बड़े होने कि लालसा जो रहती है पर अब जब बड़े हो जाओ वही पुराने अच्छे पल वो दोस्त,स्कूल बहुत याद आते हैं.वास्तव में वो गुज़रे लम्हे वापस नहीं आते और अपनी मीठी मीठी यादें छोड़ जाते है.

14 टिप्‍पणियां:

  1. भावविभोर रचना पसंद आया|
    शुभकामनाये स्वीकार करे|

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  2. बिता समय कभी वापस नहीं आता और हमारे पास रहा जाती है तो सिर्फ यादें ......

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  3. kaas! kitaabo ke panno jaisi palat jati meri bhi jindgi... kuch aisa hi sochne pe majbur karta apka lekh...

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  4. हम भी काश बचपन में वापस लौट जाते अब तो हमारे बच्चे हैं....जिनको खिलखिलाता देखकर बचपन जीते हैं। याद आता है उनके बचपन से अपना बचपन....
    फॉलो कर रही हूं...
    प्लीज वर्ड वैरिफिकेशन हटा दीजिए...

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  5. बचपन की यादों को ताज़ा करती हुई रचना अब तो हम कहेंगे काश ! ऐसा होता लौट कर बचपन में आ जाते ...

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  6. बचपन की यादों को ताज़ा करती हुई रचना|धन्यवाद|

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  7. बिलकुल गुज़रा हुआ वक्त कभी वापस नहीं आता.
    अच्छा लिखती हैं आप. आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा. ऐसे ही लिखती रहिए.

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  8. बचपन की यादों को ताज़ा करती हुई रचना

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  9. पहली बार पढ़ रहा हूँ आपको नेहा जी भविष्य में भी पढना चाहूँगा सो आपका फालोवर बन रहा हूँ ! शुभकामनायें

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  10. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं संजय भास्कर हार्दिक स्वागत करता हूँ.
    नेहा जी
    कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...
    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो NO करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  11. neha hiiiiiiiiii...aapne to bachpan yaad dila dia...kaise chhoti chhoti chijo ki pane ki jo lalsa hoti thi use bhulaya nhi ja sakta....bhut sundar likha aapne...

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  12. अप्रैल माह आते आते स्कूलों में एडमिशन का दौर चलने लगता है जहाँ बच्चों कि लालसा उनकी नयी कॉपी,किताब,बैग,पेंसिल,रबर,नयी ड्रेस होती है वहीँ सबसे बड़ी दिक्कत माता पिता की जेब पर आ जाती है. लेकिन बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए उन्हें सब करना ही होता है.
    बहुत सही बात कही आपने
    आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा...
    कभी हमारे ब्लॉग में भी पधारे.. हमे खुशी होगी . नया जो हूँ...
    avinash001.blogspot.com इंतजार रहेगा आपका

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  13. नेहा जी बिलकुल सही लिखा है आपने

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  14. आप सभी को धन्यवाद् !!!!!!!

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