मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

अधूरे ख्वाब ......

जिसको  मैंने अपना समझा वो तो मेरा कभी था ही नहीं,
बस ख्वाब था,
एक छोटा सा जो मेरे साथ अभी भी है
उसकी  परछाई को भी मैंने अपना समझा था,
शायद वो ख्वाब सिर्फ ख्वाब ही था
जो आज भी अधूरा अभी भी है.
क्रमशः ..........

6 टिप्‍पणियां:

  1. कहने को तो बहुत कुछ कहने का मन हो रहा है नेहा जी! पर अभी सिर्फ यही कहूँगा कि लग रहा है जैसे मेरे मन की ही बात कह दी हो आपने.
    अगले भाग का इंतज़ार रहेगा.

    शुभकामनाएं!

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  2. शायद वो ख्वाब सिर्फ ख्वाब ही था
    जो आज भी अधूरा अभी भी है...bhut hi acchi suruwat hai.. khwab adhura ho to kya us adhure khwab ke sath ye panktiya to puri ho jaygi... intjar rahega un panktiyo ka...

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  3. क्रमशः 'के लिए शुभकामनाएं.' ख़वाब!
    शहद से मीठे
    कडवे शहद के मीठे
    ख़वाब
    बस ख़वाब!
    ---
    मैं शादी क्यों करूं...? Its All About Marriage DEBATE @ उल्टा तीर

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  4. बहुत सुन्दर शब्द चुने आपने कविताओं के लिए..

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  5. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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